@rishtonkeankahesawal
"क़लम जब भी चलती है, किसी के दिल की चीख़ बनकर पन्नों पर बिखर जाती है। मैं हूँ 'दर्द की ज़ुबान'... जो उन अनकहे जज़्बातों को लफ़्ज़ देती हूँ जिन्हें दुनिया अक्सर 'ज़िम्मेदारी' कहकर भूल जाती है। अगर आप भी भीड़ में रहकर एक खामोश अकेलेपन को जीते हैं, तो स्वागत है आपका मेरी इस दुनिया में। पन्ने पलटते रहिए
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